सिवनी

आधारविहीन नेता भी कर रहे नगर पालिका अध्यक्ष के लिये दावेदार

  • नगरीय निकाय के ठेकेदार भी मांग रहे है टिकिट
    सिवनी 07 मार्च 2021 (लोकवाणी)। विगत 15 वर्षों से नगर पालिका परिषद सिवनी में भारतीय जनता पार्टी द्वारा चयनित प्रत्याशी अध्यक्ष पद का चुनाव आसानी से जीतता चला आया है, जहां श्रीमति पार्वती जंघेला के बाद राजेश त्रिवेदी एवं श्रीमति आरती शुक्ला विगत वर्षों में इस पद पर अपना कार्यकाल पूर्ण कर चुके है। ऐसे में भाजपा से जुड़े कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी भी भाजपा के कमल निशान के आधार पर चुनाव जीतने की मंशा रखते हुये अध्यक्ष पद के लिये स्वयं को संगठन के समक्ष दावेदार प्रस्तुत करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे है।
    भाजपा से दावेदारी करने वालों में ऐसे कई नेता है, जिनका नगर में कोई जनाधार नहीं है, यहां तक की इन नेताओं को पालिका के अंतर्गत आने वाले वार्डों के नाम तक मालूम नहीं है, वहीं अनेक दावेदारों को वार्डों की सीमा का पता ही नहीं है, केवल भाजपा के नाम पर जीत की आशा लगाये बैठे ऐसे दावेदारों की लंबी कतार देखकर जिला संगठन भी हदप्रभ्र है, क्योंकि पालिका का चुनाव जीतने हेतु ना केवल नगरीय क्षेत्र में स्वयं का आधार होना आवश्यक है, वहीं निरंतर वार्डों में संपर्क भी जीत की पहली सीढ़ी माना जाता है। कांगे्रस एवं भाजपा दोनों में ही ऐसे दावेदारों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिनक पृष्ठ भूमि ग्रामीण अंचल है, जहां पूर्व में वे जिला पंचायत एवं मंडी समिति के चुनाव गैर दलीय आधार पर हुई निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान जीत हासिल कर चुके है।
    भाजपा वर्तमान में सत्ता में है और उसके पास स्थानीय विधायक के तौर पर मुनमुन राय जैसा युवा चेहरा मौजूद है, ऐसे में पिछले दरवाजे से कई दावेदार प्रदेश एवं केंद्रीय संगठन में पदस्थ अपने हित चिंतकों से लगातार संपर्क कर टिकिट प्राप्त करने के लिये प्रयास कर रहे है, जबकि इन नेताओं के पास स्वयं का कोई बड़ा व्यापक और जनाधार है ही नहीं।
    यही स्थिति विपक्ष में बैठी कांगे्रस की है, जहां उसके पास पिछड़ा वर्ग से आने वाला कोई बड़ा सर्वमान्य चेहरा उपलब्ध नहीं है, अभी तक जिन दावेदारों ने पार्टी के समक्ष अध्यक्ष पद हेतु नाम रखा है, उनमें से कुछ नाम ऐसे है, जिनका नगर की राजनीति से दूर-दूर तक वास्ता ही नहीं है। हालांकि कुछ दावेदार ऐसे भी है, जो वर्षों से नपा परिषद सिवनी की राजनीति में पार्षद के तौर पर सक्रिय रहे है, लेकिन जातिगत व धार्मिक समीकरणों के चलते पार्टी इन्हें टिकिट देने पर विचार अवश्य कर रही है, लेकिन अंतिम फैसला अभी तक नहीं हो पाया है।
    कुल मिलाकर देखा जाये तो प्रतिवर्ष करोड़ों रूपये के बजट वाले नगर पालिका सिवनी को संचालित करने के लिये अध्यक्ष पद प्राप्त करने की कोशिश जारी है क्योंकि इस दौरान आसानी से मिलने वाली अतिरिक्त आय निर्वाचित होते ही अध्यक्षों को प्राप्त होने लगती है। राजनीति जिसे कभी जन सेवा का माध्यम माना जाता था, वह अब व्यवसाय हो चुका है, ऐसे में दावेदार भी तमाम दाव पेंच लगाकर बिना जनाधार के भी स्वयं को पार्टी का सबसे योग्य प्रत्याशी साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। अभी से ही नगरीय निकाय चुनाव को लेकर वे नाम प्रमुखता से सामने आ रहे है, जो कि नगर पालिका सिवनी में ही ठेकेदारी करते हुये आर्थिक लाभ अर्जित करते रहे है, या फिर अप्रत्यक्ष रूप से अपने अधिनस्थों को ठेकेदारी में उतार चुके है। राजनीति के बल पर नगर पालिका की ठेकेदारी वर्षों से चली आ रही है, जहां निर्माण कार्यों की सूची बनने से पहले ही तथाकथित नेता कामों का आपस में बटवारा कर लेते है, ऐसे ही चेहरे आगामी नगर पालिका चुनाव में अध्यक्ष पद की दावेदारी व पार्षद बनने की इच्छा रखते हुये पार्टी से टिकिट की अपेक्षा रख रहे है। अंदाज लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में सिवनी नगर पालिका को कैसा अध्यक्ष मिलेगा?

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