- प्रकृति को शुद्ध करने के लिए मन को भी शुद्ध बनायें: ब्रह्माकुमारी ज्योति बहन
सिवनी 05 जून 2021 (लोकवाणी)। कहा जाता है कि हर कार्य की शुरुवात पहले मानव मन से होती है। आज देखा जाये तो जिस तरह प्रकृति का अंधाधुंध दोहन हुआ है उसका मुख्य कारण मानव मन ही है। अत: प्रकृति को शुद्ध करने के लिए मन को भी शुद्ध बनायें। उक्ताशय का उद्गार ब्रह्माकुमारी संस्थान के नवनिर्मित भवन शांति शिखर में ऑनलाइन कांफ्रेसिंग के माध्यम से विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित ”आओ बचायें पर्यावरण विषय पर व्यक्त किये।
पर्यावरण दिवस की शुभकामना व्यक्त करते हुए आगे कहा कि आज पर्यावरण की समस्या आई क्यो? कहा जाता है कि हर चीज की अति, अंत का कारण बन जाता है। पहले आवश्यकता अनुसार प्रकृति का दोहन कर उतनी मात्रा में पेड़ लगाकर प्रकृति का संरक्षण किया जाता था, परंतु आज भौतिक आवश्यकता की पूर्ति एवं अति धन उपार्जन वृत्ति के कारण प्रकृति का अंधाधुंध दोहन हुआ और ऑक्सीजन प्लांट लगाने की नौबत आ गई है। आज मनुष्य के दूषित मन के कारण ही अनेक प्रकार के विकारों, बीमारियों की उत्पत्ति हुई एवं स्वार्थ पूर्ति के लिए प्रकृति एवं वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
कार्यक्रम में उपस्थित योगशक्ति ब्रह्माकुमारी गीता बहन ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सबसे अधिक आवश्यकता है कि अपने मन को ईष्र्या, नफरत, घृणा एवं स्वार्थ से मुक्त रखे। नगर के प्रसिद्ध वास्तु विशेषज्ञ अनुराग अग्रवाल ने पंचवटी लगाओं, सेहत बनाओं पर सभी का ध्यान केन्द्रित किया, उन्होंने कहा कि पीपल, बरगद, आंवला, बेल एवं अशोक इन पांच वृक्षों का ऐसा झुण्ड जिसे रोपित करने से शत-प्रतिशत वातावरण को शुद्ध बनाया जा सकता है। इसी प्रकार अंकित मालू ने कहा कि आज रासायनिक खाद का उपयोग समस्त प्राणियों के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। अत: हमें जैविक खाद के उपयोग पर क्रान्ति लाकर भूमि को उवर्रक एवं अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। कार्यक्रम का सफल संचालक राजयोगी ब्रह्माकुमारी नीतू बहन द्वारा किया गया।




