देश / विदेश मध्य प्रदेश सिवनी

सिवनी के आभाष रहांगडाले सातवें प्रयास में बने भारतीय सेना के अधिकारी

– उच्च वेतन का अवसर छोड़ चुनी देश सेवा की राह


सिवनी 10 सितंबर (लोकवाणी)। मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के होनहार युवक आभाष रहांगडाले ने सातवें प्रयास में सफलता प्राप्त कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में चयन पाया है। कठिन संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति से मिली इस उपलब्धि ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची लगन और धैर्य से कोई भी लक्ष्य असम्भव नहीं।
ज्ञात हो कि आभाष ने स्नातक की पढ़ाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एन.आई.टी.) भोपाल से पूरी की। इसके बाद गेट परीक्षा में 291वीं रैंक लाकर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी.) खड़गपुर में प्रवेश लिया। अध्ययन के दौरान उन्हें निजी क्षेत्र से 16 लाख रुपये वार्षिक वेतन का प्रस्ताव मिला, जिसे अधिकांश विद्यार्थी जीवन की सबसे बड़ी सफलता मानते हैं। परन्तु आभाष के लिए यह केवल एक पड़ाव था। उन्होंने देश सेवा के संकल्प को प्राथमिकता देते हुए इस अवसर को अस्वीकार कर सेना का कठिन मार्ग चुना।
सात प्रयासों का संघर्ष
छह बार असफल होने के बावजूद आभाष ने हार नहीं मानी। सातवें प्रयास में उनका चयन हुआ और यह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की भावना की विजय थी। ज्ञात हो कि आभाष के पिता दिकपाल सिंह रहांगडाले और माता श्रीमती रेवंता रहांगडाले दोनों ही शिक्षक हैं। माता-पिता से मिले संस्कार, नैतिकता और देशप्रेम ने आभाष को सही दिशा प्रदान की।लेफ्टिनेंट आभाष का संदेश
आभाष राहंगडाले ने बताया कि उन्होंने एन.आई.टी., आई.आई.टी. और निजी क्षेत्र के अवसरों को निकट से देखा है, परन्तु आत्मसंतोष केवल वर्दी पहनकर देश की सेवा करने में है। असफलताएँ आईं, पर हर बार मेरा संकल्प और प्रबल हुआ। युवाओं से कहना चाहता हूँ कि यदि सपनों में देश है तो हार का भय मन से निकाल दो। आज आभाष रहांगडाले केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, जो कठिनाइयों से घबराकर अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि सबसे बड़ी लड़ाई वही है, जो इंसान अपने सपनों को साकार करने के लिए स्वयं से लड़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *