सिवनी/घंसौर 11 सितबर (लोकवाणी)। बरगी बांध से विस्थापित एवं प्रभावित वनग्राम लेहङीकोल को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ग्रामीणों ने हाल ही में सिवनी कलेक्टर से चर्चा कर मांग रखी थी कि जिन भूमियों पर ग्रामीणों का कब्ज़ा है और जिनका वन अधिकार पत्र जारी हो चुका है, उन्हें गांव की सीमा में शामिल किया जाए। कलेक्टर ने ग्रामीणों की मांग स्वीकार करते हुए आश्वस्त किया कि पट्टे वाली वन भूमि को गांव की सीमा के अंदर जोड़ा जाएगा। वर्तमान में ग्राम लेहङीकोल के 115 परिवारों को वन अधिकार पत्र प्राप्त हो चुका है, जबकि कुछ पात्र परिवारों को पत्र मिलना बाकी है।

बताया गया कि पहले सरकारी अमले द्वारा केवल गांव सीमा के भीतर की जमीन का सर्वे किया जा रहा था, जिससे गतिरोध की स्थिति बनी हुई थी। अब यह प्रक्रिया वन अधिकार मान्यता कानून 2006 की धारा 3(1)(ज) एवं 3(1)(छ) के तहत की जाएगी। मध्यप्रदेश जनजातीय कार्य विभाग ने 16 अप्रैल 2025 को जारी दिशा-निर्देशों में कहा है कि वन ग्राम की बाहरी सीमा का स्थल सत्यापन कर, जीपीएस सर्वे से नक्शा तैयार किया जाएगा। इसके लिए वन विभाग, पटवारी और वन अधिकार समिति के सदस्य संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। ज्ञात हो कि सिवनी जिले के 28 वनग्रामों को भी इसी प्रावधान के तहत राजस्व ग्रामों में बदला जाना है।
ग्राम पंचायत बगदरी की सरपंच सुशीला नरेती एवं वनग्राम लेहङीकोल के ग्रामीण हल्की बाई कुरोपा, रामकली बाई उईके, दान सिंह काकोङीया, रणबीर मर्रापा, धरम सिंह कोकङिया, बृजलाल चिचाम, देवक राम मर्रापा आदि ने कलेक्टर सिवनी का आभार व्यक्त किया है।



